हेलो दोस्तों, मेरा नाम प्रत्यूष द्विवेदी, जैसे कि आप जानते हैं। आपने मेरी पिछली स्टोरी पढ़ी होगी। आज मैं आपके लिए फिर से एक नई स्टोरी लेकर आया हूं। यह भी स्टोरी मेरे सच्ची घटना पर आधारित है। आशा करता हूं यह कहानी भी आपको पसंद आएगी। तो चलो अब देर ना करते हुए सीधा स्टोरी पर आते हैं।
मुंबई की हलचल भरी जिंदगी के बीच एक पुरानी इमारत खड़ी है। जहां लगता है जैसे समय ठहर सा गया हो। नीचे वाली मंजिल पर मैं रहता हूं—एक बैचलर लड़का, जो आईटी कंपनी में काम करता है। मेरा छोटा सा 1RK फ्लैट है—एक कमरा, एक रसोई और एक बाथरूम। जगह छोटी है, लेकिन मुझे अब अकेलेपन की आदत पड़ चुकी है। इमारत की दीवारें इतनी पतली हैं कि पड़ोसियों की हर आवाज साफ सुनाई देती है।



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